विक्टोरिया मोड (VM) परिघटना
पाठ्यक्रम: GS1 / भूगोल; GS3 / पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन
संदर्भ
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक हालिया अध्ययन में भारत के जलवायु क्षेत्रों में होने वाले परिवर्तनों को प्रशांत महासागर की विक्टोरिया मोड (VM) नामक परिघटना से संबंधित बताया गया है।
विक्टोरिया मोड क्या है?
- विक्टोरिया मोड (VM) उत्तरी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में होने वाले उष्ण एवं शीत परिवर्तनों का एक आवर्ती प्रतिरूप है।
- यह वायुमंडलीय परिसंचरण तथा आर्द्रता के परिवहन को प्रभावित करता है, जिससे भारत सहित दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षा के प्रतिरूप प्रभावित होते हैं।
- अध्ययन के अनुसार, विक्टोरिया मोड का ऋणात्मक चरण उत्तरी भारत की ओर आर्द्रता के परिवहन में कमी से जुड़ा है। इससे वर्षा में गिरावट तथा शुष्क जलवायु क्षेत्रों के विस्तार में योगदान मिलता है।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
- उत्तर-पश्चिम भारत: गर्म अर्द्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु क्षेत्र का विस्तार वर्ष 1951–1980 में 25.7% से बढ़कर वर्ष 1991–2020 में 33.1% हो गया। समशीतोष्ण जलवायु क्षेत्र का विस्तार 25.8% से घटकर 18.7% रह गया।
- स्टेपी जलवायु क्षेत्र की पूर्वी सीमा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से स्थानांतरित होकर राज्य के पूर्वी हिस्से तक पहुँच गई।
- उत्तर-पूर्व भारत: उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु क्षेत्र का विस्तार 18.4% से घटकर 11.8% रह गया, जबकि समशीतोष्ण जलवायु क्षेत्र का विस्तार 74.8% से बढ़कर 82.5% हो गया।
- गंगा के मैदान: अध्ययन में गंगा के मैदानी क्षेत्रों में शुष्कता बढ़ने की प्रवृत्ति के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी भागों के कुछ क्षेत्रों में सवाना जलवायु से समशीतोष्ण जलवायु की ओर परिवर्तन देखा गया।
- प्रायद्वीपीय भारत: गर्म अर्द्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु क्षेत्र का विस्तार वर्ष 1951–1980 में क्षेत्रीय भूभाग के 30.3% से घटकर वर्ष 1991–2020 में 16.4% रह गया। उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु क्षेत्र 61.6% से बढ़कर 75.7% हो गया।
- कोंकण एवं गोवा, तटीय कर्नाटक तथा केरल एवं माहे में उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु क्षेत्र का विस्तार हुआ।
- पश्चिमी भारत: सौराष्ट्र एवं कच्छ के कुछ भागों में शुष्क जलवायु से अर्द्ध-शुष्क जलवायु की ओर परिवर्तन हुआ, जबकि पश्चिमी विदर्भ एवं मराठवाड़ा में अर्द्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु की ओर बदलाव देखा गया।
स्रोत: TH
वैश्विक दक्षिण के समक्ष ‘4F संकट’
पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में जारी युद्धों के कारण वैश्विक दक्षिण के समक्ष वित्त, ईंधन, खाद्य और उर्वरक से संबंधित 4F संकट उत्पन्न हो रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक उत्तर की अधिक जवाबदेही आवश्यक है।
4F संकट के बारे में
- ईंधन : संघर्षों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर आदि जैसे महत्त्वपूर्ण समुद्री आवागमन मार्गों में व्यवधान से तेल एवं गैस की आपूर्ति सीमित हो जाती है। इससे परिवहन लागत तथा ईंधन मुद्रास्फीति बढ़ती है।
- उर्वरक : प्राकृतिक गैस की कमी तथा समुद्री परिवहन में व्यवधान से नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इससे किसानों का व्यय बढ़ता है तथा फसल की उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होता है।
- खाद्य : ऊर्जा, उर्वरक तथा माल ढुलाई की बढ़ती लागत से खाद्य उत्पादन एवं वितरण का व्यय बढ़ जाता है।
- विश्व बैंक की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जून के बाद से वैश्विक अनाज की कीमतों में वृद्धि हुई है। गेहूँ की कीमतों में 22% तथा मक्का की कीमतों में 26% की वृद्धि दर्ज की गई।
- वित्त: विकासशील देशों को उच्च उधार लागत, ऋण चुकाने के बढ़ते दबाव तथा विकास वित्त तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्रोत: HT
एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान एवं एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला
पाठ्यक्रम: GS3 / पर्यावरण
चर्चा में
- हाल ही में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्री ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए विश्व में अपनी तरह की प्रथम ‘वायु प्रदूषण विश्लेषण’ सुविधा का उद्घाटन किया।
एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान एवं एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला के बारे में
- यह विश्व में अपनी तरह की प्रथम ‘वायु प्रदूषण विश्लेषण’ सुविधा है।
- इसे एकीकृत वायुमंडलीय रसायन विज्ञान एवं एयरोसोल विषाक्तता विश्लेषण प्रयोगशाला (AATAL) के नाम से जाना जाता है।
- इसकी स्थापना ‘मिशन मौसम’ के अंतर्गत की गई है। इसका उद्देश्य वायुमंडलीय प्रदूषण की वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करना तथा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए उपयोगी वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराना है।
प्रमुख विशेषताएँ
- यह प्रयोगशाला उन्नत वायुमंडलीय मापन उपकरणों, विस्तृत रासायनिक विश्लेषण, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान तथा निर्णय-समर्थन क्षमताओं को एकीकृत ढाँचे के अंतर्गत समाहित करती है।
- यह वायुमंडलीय गैसों एवं एयरोसोल की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने के लिए उन्नत उपकरणों से सुसज्जित है। इसमें सूक्ष्म कण पदार्थ (PM2.5), धातुओं, विषैले तत्त्वों तथा अन्य घटकों का विश्लेषण भी शामिल है।
- यह सुविधा वायु गुणवत्ता के आकलन को केवल प्रदूषण के स्तर की जानकारी देने तक सीमित न रखकर प्रदूषकों की संरचना, उनके स्रोतों, विभिन्न स्रोतों के सापेक्ष योगदान तथा उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की पहचान करने में सहायता करेगी।
महत्त्व
- यह प्रयोगशाला प्रदूषण की संरचना तथा उसके विभिन्न स्रोतों के योगदान को समझने में सहायता करेगी। दिल्ली के लोगों की समस्याओं के समाधान तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह महत्त्वपूर्ण है।
- यह वैज्ञानिकों को वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों में अंतर करने में सहायता करेगी, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- वाहनों से होने वाला उत्सर्जन।
- औद्योगिक गतिविधियाँ।
- बायोमास एवं फसल अवशेषों का दहन।
- निर्माण कार्य तथा सड़कों से उत्पन्न धूल।
- आसपास के क्षेत्रों से परिवहित होकर आने वाले प्रदूषक।
स्रोत: PIB
भारतीय वायु सेना का 94वाँ स्थापना दिवस
पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा
संदर्भ
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायु सेना के 94वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों के अंतर्गत वाराणसी में भारतीय वायु सेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ हवाई प्रदर्शन का अवलोकन किया।
भारतीय वायु सेना के बारे में
- स्थापना: भारतीय वायु सेना की आधिकारिक स्थापना 8 अक्टूबर, 1932 को हुई थी।
- प्रथम परिचालन उड़ान: प्रथम परिचालन उड़ान 1 अप्रैल, 1933 को चार वेस्टलैंड वैपिटी विमानों के साथ संचालित की गई थी।
- ‘रॉयल’ उपसर्ग: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान योगदान के सम्मान में वर्ष 1945 में भारतीय वायु सेना के नाम के साथ ‘रॉयल’ उपसर्ग जोड़ा गया।
- स्वतंत्रता के बाद: वर्ष 1950 में भारत के गणराज्य बनने पर ‘रॉयल’ उपसर्ग हटा दिया गया।
- भूमिका: भारतीय वायु क्षेत्र की सुरक्षा करना, हवाई सैन्य अभियान संचालित करना तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत कार्यों में सहयोग देना।
- आदर्श वाक्य: ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’, जिसका सामान्यतः अनुवाद ‘गर्व के साथ आकाश को छूना’ किया जाता है, भगवद्गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। यह साहस, सेवा तथा उत्कृष्टता के आदर्शों के प्रति भारतीय वायु सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्रोत: IE
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